भारत में टांसजेंडर: एक समाजशास्त्रीय दृष्टि
Abstract
भारत में ट्रांसजेंडर व्यक्ति जिससे वैश्विक स्तर पर थर्ड जेंडर के रूप में जाना जाता है, को शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप में अभयलिंगी माना जाता है और अस्पष्टता के कारण लोगों इन्हें शैतान (अपनी यौन पहचान छुपाते हुए) मानते हैं और शारीरिक व मौखिक रूप में यौन दुव्र्यवहार होता है। ट्रांसजेंडर को काफी हद तक कलंकित और हास्य पर रखा गया है। इस प्रकार प्राचीन भारत से आज तक भारतीय समाज ने हिजड़ा और पूर्व निर्धारित लिंग श्रेणी के बीच अंतर किया है। हिजड़ा शब्द भारत में जैविक लिंग रेखाओं को धुंधला और पार करने वाली पहचान, दिखावें और व्यवहार को विस्तृत करता है। हिजड़े न तो पुरुष होते हैं और न ही स्त्री के रूप में इनको पहचान मिलती है। किसी भी उम्र के व्यक्ति जो व्यक्तिगत विशेषताओं या व्यवहारों में पुरुषों और महिलाओं से भिन्न पाए जाते हैं, उन्हें हिजड़ा नाम दे दिया जाता है। यह महिलाओं की तरह कपड़े पहनना और सजना-धजना पसन्द करते हैं। यह पुरुष या महिला लिंग की पारंपरिक धारणाओं के अनुरूप नहीं है लेकिन दोनों के बीच संयोजन या स्थानान्तरित करते हैं। ट्रांसजेंडर के सामाजिक अभाव और उत्पीड़न के आयाम को विकसित समाज में कभी ध्यान से नहीं देखा जा ता है। हिन्दू धर्म कई मिथक किवंदंतियां, अनुष्ठान, धार्मिक भूमिकाएं और विषय हैं, जो यौन रूप में अस्पष्ट या दोहरी लिंग अभिव्यक्तियों की धारणा का मनोरंजन करते हैं।
