‘‘महिला सशक्तिकरण एवं पंचायतीराज व्यवस्था’’

  • डाॅ0 रेनू गुप्ता असि0प्रोफे0-समाजशास्त्र, डी0एस0एन0 पी0जी0 कालेज, उन्नाव (उ0प्र0)
Keywords: सशक्तिकरण, परिदृश्य, गतिशील, आरक्षण, मानसिकता लोकतांत्रिक प्रणाली, नारी विमर्श, कलेवर, प्रतिमान, ग्राम-स्वराज, भागीदारी

Abstract

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् देश का जनमानस एक सम्प्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक तथा संघीय संविधान को अंगीकार, अधिनियमित और आत्मसमर्पित किया। संविधान ने पुरूषों के समान ही महिलाओं को भी राजनीतिक रूप से सशक्त करने का प्रयास किया है साथ ही साथ जाति, धर्म, वर्ग, शिक्षा एवं समपत्ति के आधार पर बिना भेदभाव के दश के सभी नागरिकों को मताधिकार का भी अधिकार दिया है।1 महिलाओं की ग्रामीण क्षेत्र में राजनीतिक भागीदारी को सुनिश्चित करने तथा महिलाओं को सशक्त बनाने हेतु सर्वप्रथम 73वें संविधान संशोधन अधिनियम-1992-93 लागू कर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान कर घर की चाहरदिवारी से बाहर निकाल कर उन्हें राजनीतिक सशक्तिकरण के साथ-साथ सामाजिक सशक्तिकरण का सुनहरा अवसर प्रदान किया है। आरक्षण का प्रावधान कर सरकार द्वारा महिलाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था की राजनीतिक पटल की मुख्य धारा में सम्मिलित कर अवसर की समानता की गारण्टी भी प्रदान करना है।

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Published
2024-11-22
How to Cite
गुप्ताड. र. (2024). ‘‘महिला सशक्तिकरण एवं पंचायतीराज व्यवस्था’’. Humanities and Development, 19(03), 20-23. https://doi.org/10.61410/had.v19i3.199