कंुभपर्व, गंगा, और प्रयाग की धार्मिक मान्यताएं
Abstract
कुंभ का अर्थ घड़ा होता है। इसका निर्माण नव पाषाण काल में हाथ और चाक दो विधियों से किया गया जो आज भी प्रचलन में है। मानव ही नहीं प‛ाुओं को भी जीवन के लिए पानी की आव‛यकता होती है, कारण कि ॉारीर का 75 अं‛ा पानी ही होता है। इसलिए पानी को अमृृत कह दिया जाता है। एक परिभाषा के अनुसार जो अमृृतमय जल से पूर्ण कर क्षुत पिपासादि द्वन्द्वों से निवृृत्त करता है उसे कुंभ कहते हैं। कुंभयति अमृृतेन पूरयति सकल क्षुत पिपासादि द्वन्द्वं जातं निवर्तयति इति कुंभ। भारतीय ज्योतिष में कुंभ 11वीं रा‛िा भी है।
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Published
2025-01-18
How to Cite
तिवारीप. ड., & ओझाअ. (2025). कंुभपर्व, गंगा, और प्रयाग की धार्मिक मान्यताएं. Humanities and Development, 19(04), 4-13. Retrieved from https://humanitiesdevelopment.com/index.php/had/article/view/232
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