कंुभपर्व, गंगा, और प्रयाग की धार्मिक मान्यताएं

  • प्रो0 डी0पी0 तिवारी प्रेसिडेंट/कुलपति, जय मीने‛ा आदिवासी वि‛वविद्यालय, रानपुर, कोटा, राजस्थान पूर्व कुलपति, वीर कुंवर सिंह वि‛वविद्यालय, आरा, बिहार।
  • अनुष्का ओझा पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष, प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग, लखनऊ, वि‛वविद्यालय लखनऊ।सहायक आचार्य, श्री कल्लाजी वैदिक वि‛वविद्यालय, निम्बाहेड़ा, चित्तौड़गढ़, राजस्थान।

Abstract

कुंभ का अर्थ घड़ा होता है। इसका निर्माण नव पाषाण काल में हाथ और चाक दो विधियों से किया गया जो आज भी प्रचलन में है। मानव ही नहीं प‛ाुओं को भी जीवन के लिए पानी की आव‛यकता होती है, कारण कि ॉारीर का 75 अं‛ा पानी ही होता है। इसलिए पानी को अमृृत कह दिया जाता है। एक परिभाषा के अनुसार जो अमृृतमय जल से पूर्ण कर क्षुत पिपासादि द्वन्द्वों से निवृृत्त करता है उसे कुंभ कहते हैं। कुंभयति अमृृतेन पूरयति सकल क्षुत पिपासादि द्वन्द्वं जातं निवर्तयति इति कुंभ। भारतीय ज्योतिष में कुंभ 11वीं रा‛िा भी है।

Downloads

Download data is not yet available.
Published
2025-01-18
How to Cite
तिवारीप. ड., & ओझाअ. (2025). कंुभपर्व, गंगा, और प्रयाग की धार्मिक मान्यताएं. Humanities and Development, 19(04), 4-13. Retrieved from https://humanitiesdevelopment.com/index.php/had/article/view/232