महाकुम्भ मेला, प्रयागराज का बदलता परिदृ‛यः एक समाज ॉाास्त्रीय अध्ययन

  • योगेन्द्र प्रसाद त्रिपाठी आचार्य, समाज‛ाास्त्र विभाग, का0सु0 साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अयोध्या
  • नीलम त्रिपाठी पूर्व सदस्य, बाल न्यायालय बोर्ड, फैजाबाद
  • प्रगति ॉाुक्ला, ॉाोधार्थी, समाज‛ाास्त्र विभाग, का0सु0 साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अयोध्या
Keywords: महाकुम्भ मेला, प्रयागराज, गंगा, यमुना, सरस्वती, संगम।

Abstract

उत्तर प्रदे‛ा का प्रयागराज जनपद जो अपनी धार्मिक क्रियाकलापों के लिए जाना जाता है चाहे पवित्र नदियों (गंगा, यमुना, सरस्वती) का संगम हो या ऋषि भारद्वाज का आश्रम व लेटे हनुमान जी का मन्दिर। माँ गंगा के किनारे प्रत्येक वर्ष माघ मेला होता है तो प्रत्येक 6 वर्ष में अर्द्धकुम्भ और 12 वर्ष में महाकुम्भ का आयोजन किया जाता है। जहाँ पर दे‛ा विदे‛ा के श्रद्धालुओं का आगमन होता है। परन्तु 2025 में माघ के महीने में जो वृहद महाकुम्भ होने वाला है वह अपने आप में अनूठा व सर्वमंगलकारी है। वृहद इसलिए क्योंकि 144 वर्ष के बाद ये संयोग बन रहा है। कुम्भ मेले का उल्लेख महाभारत के वन पर्व में है। रामचरित मानस के किष्किंधा काण्ड में भी कुम्भ मेले का वर्णन है।

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Published
2024-12-30
How to Cite
त्रिपाठीय. प., त्रिपाठीन., & ॉाुक्ला,प. (2024). महाकुम्भ मेला, प्रयागराज का बदलता परिदृ‛यः एक समाज ॉाास्त्रीय अध्ययन. Humanities and Development, 19(04), 53-59. Retrieved from https://humanitiesdevelopment.com/index.php/had/article/view/241