अभिलेखों में सामाजिक एवं आर्थिक जीवन

  • अवध नारायण शोध निर्देशक- सह आचार्य, इतिहास, संस्‟ति एवं पुरातत्व विभाग, ड. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या
  • पंकज शर्मा शोध छात्र, इतिहास, संस्‟ति एवं पुरातत्व विभाग, ड. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या
Keywords: अभिलेख (प्देबतपचजपवदे), सामाजिक संरचना, आर्थिक जीवन, भूमि-दान प्रणाली, व्यापार एवं वाणिज्य, धार्मिक संस्थाएँ, प्राचीन एवं प्रारम्भिक मध्यकालीन भारत

Abstract

यह शोध पत्र भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक अभिलेखों ;प्देबतपचजपवदेद्ध के आधार पर प्राचीन एवं प्रारम्भिक मध्यकालीन समाज के सामाजिक तथा आर्थिक जीवन का अध्ययन प्रस्तुत करता है। अभिलेख‟जैसे शिलालेख, ताम्रपत्र, स्तंभलेख और दानपत्र‟समकालीन परिस्थितियों के प्रत्यक्ष एवं प्रामाणिक प्रमाण माने जाते हैं। इन स्रोतों के माध्यम से उस समय की सामाजिक संरचना, जाति व्यवस्था, ग्राम संगठन, स्त्रियों की स्थिति तथा धार्मिक संस्थाओं की भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। साथ ही अभिलेख आर्थिक जीवन के विविध पहलुओं, जैसे ‟षि व्यवस्था, भूमि स्वामित्व, भूमि-दान प्रणाली, कर-व्यवस्था, सिंचाई व्यवस्था, व्यापारिक गतिविधियाँ तथा शिल्प और उद्योग‟पर भी प्रकाश डालते हैं। इस शोध में विभिन्न अभिलेखों का विश्लेषण कर यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि प्राचीन भारतीय समाज केवल ‟षि पर आधारित नहीं था, बल्कि उसमें व्यापार, शिल्प और नगरों का भी महत्वपूर्ण स्थान था। अनेक अभिलेखों में व्यापारिक संघों, शिल्पकार वर्गों तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार के संकेत मिलते हैं, जो उस समय की विकसित आर्थिक संरचना को दर्शाते हैं। साथ ही मंदिर, विहार और अन्य धार्मिक संस्थाएँ सामाजिक-सांस्‟तिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों के भी प्रमुख केंद्र थे। अतः यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि अभिलेख इतिहास लेखन के लिए अत्यंत विश्वसनीय स्रोत हैं, जिनके माध्यम से प्राचीन भारतीय समाज की सामाजिक संरचना, आर्थिक संगठन तथा प्रशासनिक व्यवस्था का समग्र और प्रामाणिक चित्र प्राप्त होता है।

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Published
2026-05-05
How to Cite
नारायणअ., & शर्माप. (2026). अभिलेखों में सामाजिक एवं आर्थिक जीवन. Humanities and Development, 21(01), 4-11. Retrieved from https://humanitiesdevelopment.com/index.php/had/article/view/325