माध्यमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा की प्रासंगिकता

  • विकास कुमार सिंह शोध छात्र -शारीरिक शिक्षा विभाग, ड. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या उ. प्र.
  • आशीष प्रताप सिंह शोध निर्देशक -आचार्य, शारीरिक शिक्षा विभाग, का. सु. साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अयोध्या, उ. प्र.
Keywords: शारीरिक शिक्षा, आत्मविश्वास, जीवन शैली, अनुशासन, नेतृत्व, क्षमता, सहयोग, योग प्राणायाम, संर्वधन, अभिभावक, जागरूक

Abstract

शिक्षा का आशय मात्र बौद्विक शक्ति या विकास करना ही नहीं, बल्कि शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति के समग्र विकास से भी होता है। वास्तव में शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य तभी प्राप्त हो सकेगा जब विद्यार्थियों की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और नैतिक विकास संतुलित रूप में हो, इसी कारण माध्यमिक (इण्टरमीडिएट कालेज) विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा को अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। वर्तमान आधुनिक परिवेश में विद्यार्थियों के जीवन का अधिकांश क्षण मोबाइल, टी0वी0, इण्टरनेट और कम्प्यूटर के साथ व्यतीत होता है, जिससे उनकी शारीरिक सक्रियता धीरे-धीरे कम होती जा रही है, जिसके परिणाम स्वरूप मोटापा, तनाव, आलस्य जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से उन्हें जूझना पड़ता है। स्कूल, कालेज में शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक शिक्षा पर भी सरकार द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि हमारी नई पीढ़ी शैक्षिक विकास के साथ शारीरिक विकास भी कर सके। श

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Published
2026-05-05
How to Cite
सिंहव. क., & सिंहआ. प. (2026). माध्यमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा की प्रासंगिकता. Humanities and Development, 21(01), 12-15. Retrieved from https://humanitiesdevelopment.com/index.php/had/article/view/326