बिहार में प्राचीन काल में उच्च शिक्षाः नालन्दा विश्वविद्यालय के विशेष संदर्भ में

  • राजेश्वर कुमार असिस्टेंट प्रोफेसर - समाजशास्त्र, राजकीय महिला महाविद्यालय, बलिया।
  • अभिषेक आर्ष असिस्टेंट प्रोफेसर - इतिहास, कमला देवी बाजोरिया डिग्री कालेज बलिया।

Abstract

प्राचीन काल से ही बिहार राज्य सभ्यता, संस्‟ति, विरासत, वैभव, शासन - प्रणाली एवं शिक्षा के स्तर अग्रणी रहा है तथा इसे पहला अखिल भारतीय साम्राज्य बनने का गौरव प्राप्त रहा है। ऐतिहासिक तथ्यों से यह ज्ञात होता है कि इस राज्य का प्राचीन इतिहास अत्यन्त गौरवशाली होने के साथ - साथ यहाँ शिक्षा का विकास भी वैश्विक स्तर का रहा है। प्राचीन भारत का सबसे प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण शिक्षा केंद्र नालंदा विश्वविद्यालय में विज्ञान, चिकित्सा, गणित, खगोलशास्त्र, अध्यात्म, दर्शनशास्त्र, तर्क, व्याकरण, लिपि, पुस्तक संस्‟ति, अनुवाद, साहित्य, कला वास्तुकला एवं सभ्यता व संस्‟ति की ऐसी किरण प्रस्फुटित हुई जिससे न केवल भारत बल्कि समस्त संसार आलोकित हुआ। मौर्यवंश से लेकर गुप्तकाल तक का समय प्राचीन कला, ज्ञान एवं विज्ञान हेतु स्वर्णिम काल माना जाता हैं। मौर्य वंश के पतन के बाद गुप्त काल में भी बिहार में ज्ञान-विज्ञान का व्यापक प्रचार एवं प्रसार हुआ जिसके कारण इस क्षेत्र का उत्तरोत्तर विकास हुआ।

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Published
2026-05-05
How to Cite
कुमारर., & आर्षअ. (2026). बिहार में प्राचीन काल में उच्च शिक्षाः नालन्दा विश्वविद्यालय के विशेष संदर्भ में. Humanities and Development, 21(01), 30-34. Retrieved from https://humanitiesdevelopment.com/index.php/had/article/view/329