प्रतिस्पर्धी छात्रों में द्रव्य-दुव्र्यसन: समाजशास्त्रीय अन्तर्दृष्टि

  • कृतिका सिंह शोधिका एवं सहायक आचार्या, समाजशास्त्र विभाग, एम0ए0, नेट, समाजशास्त्र के0एन0आई0पी0एस0एस0, सुल्तानपुर।

Abstract

छात्रों में द्रव्य-दुव्र्यसन की समस्या ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है, क्योंकि आज यह समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। आज यह समस्या किसी एक समाज, किसी एक संस्‟ति अथवा किसी एक देश तक सीमित नहीं है बल्कि यह एक सार्वभौमिक समस्या बनकर उभरी है। इस समस्या को हम नई नहीं कह सकते बल्कि ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर कहा जा सकता है कि मानव सभ्यता के उद्भव काल से ही यह निरन्तर बनी हुई है। प्राचीन काल ही नहीं बल्कि आज भी कई संस्‟तियों एवं लघु मानव समूहों में विभिन्न प्रकार के मादक पदार्थों के उपयोग को सांस्‟तिक के साथ ही धार्मिक मान्यता मिली हुई थी, और है भी। जिन द्रव्यों या पदार्थों के प्रयोग से व्यक्ति में व्यवहार सम्बन्धी परिवर्तन उत्पन्न होता है, उन्हें मनोसक्रिय औषधियाँ कहते हैं। ये ऐसी औषधियाँ या पदार्थ हैं जिनके सेवन से व्यक्ति की चेतना, मनोदशा या चिन्तन-प्रक्रिया में परिवर्तन हो जाता है। ये पदार्थ या औषधियाँ व्यक्ति के मस्तिष्क की उन क्रिया-प्रणालियों को प्रभावित करती हैं जो सामान्यतः अभिप्रेरक प्रक्रियाओं, चिन्तन एवं मनोदशा को नियमन करती हैं। विगत कुछ वर्षों से भारत में मादक द्रव्यों के सेवन की प्रवृत्ति में काफी उछाल आया है और चोरी-छिपे इनका विदेशों से आयात होता रहा है। यह कहना अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं होगा कि विश्वविद्यालयो, महाविद्यालयों तथा अनेकानेक कोचिंग संस्थानों में अध्ययनरत छात्रों में इसके प्रयोग की बाढ़ सी आ गयी है। संसार से ऊबे हुए लोग, चिन्ता रहित, मुक्त एवं स्वच्छन्द जीवन जीने की लालसा में तथा मानसिक शांति के लिए लोग मादक पदार्थों का सेवन करते हैं। यह भी देखने में आया है कि इनके सेवन से युवा पीढ़ी में यौन-स्वच्छन्दता भी बढ़ी है जो वर्तमान के साथ भविष्य के लिए भी भयावह स्थिति की सूचक है। इस भयावह स्थिति के उत्पन्न होने के अनेक कारण हैं जिन पर इस लघु शोध-प्रपत्र में प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है।

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Published
2026-05-05
How to Cite
सिंहक. (2026). प्रतिस्पर्धी छात्रों में द्रव्य-दुव्र्यसन: समाजशास्त्रीय अन्तर्दृष्टि. Humanities and Development, 21(01), 35-42. Retrieved from https://humanitiesdevelopment.com/index.php/had/article/view/330