अभिराज राजेन्द्र मिश्र कृत ‘प्रशान्तराघवम्’ नाटक में छन्दोयोजना

  • अनामिका पाण्डेय ॉाोध निर्दे‛ाक- आचार्य: संस्कृत विभाग, बी.बी.डी. पी.जी. काॅलेज, परुइया आश्रम, अम्बेडकरनगर।
  • पवन कुमार गुप्ता शोध छात्रा- संस्कृत विभाग, बी.बी.डी. पी.जी. काॅलेज, परुइया आश्रम, अम्बेडकरनगर।
Keywords: प्रशान्तराघवम्, अभिराज राजेन्द्र मिश्र, छन्द-योजना, शार्दूलविक्रीडित, स्रग्धरा, वसन्ततिलका, अनुष्टुप, संस्श्त नाटक, छन्दशास्त्र, गीतिछन्द, नाट्य सौन्दर्य।

Abstract

प्रस्तुत शोध-आलेख में अभिराज राजेन्द्र मिश्र श्त नाटक ‘प्रशान्तराघवम्’ की छन्द-योजना का विश्लेषण किया गया है। इस अध्ययन में नाटक में प्रयुक्त विभिन्न छन्दों- शार्दूलविक्रीडित, स्रग्धरा, वसन्ततिलका, अनुष्टुप, हरिणी, शिखरिणी, इन्द्रवज्रा, उपेन्द्रवज्रा, उपजाति, द्रुतविलम्बित तथा गीतिछन्द का स्वरूप, लक्षण एवं प्रयोग-प्रसंगों का विवेचन किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि कवि ने छन्दों का चयन केवल छन्दशास्त्रीय सौन्दर्य के आधार पर ही नहीं किया, बल्कि रस-निष्पत्ति, भावाभिव्यक्ति एवं नाटकीय प्रभाव को सशक्त बनाने के लिए भी किया है। विविध छन्दों के माध्यम से नाटक में गेयता, नाटकीयता तथा भाव-गहनता का समन्वय दिखाई देता है। अतः प्रशान्तराघवम् की छन्द-योजना इसे एक समृद्ध और शास्त्रीय श्ष्टि से सुश्ढ़ नाट्यश्ति के रूप में स्थापित करती है।

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Published
2026-06-25
How to Cite
पाण्डेयअ., & गुप्ताप. क. (2026). अभिराज राजेन्द्र मिश्र कृत ‘प्रशान्तराघवम्’ नाटक में छन्दोयोजना. Humanities and Development, 21(02), 164-170. Retrieved from https://humanitiesdevelopment.com/index.php/had/article/view/368