नारी चेतना के सन्दर्भ में ममता कालिया का उपन्यासः सपनों की होम डिलीवरी
Abstract
ममता कालिया श्त उपन्यास ‘सपनों की होम डिलीवरी’ समकालीन भारतीय समाज की उस नारी की कहानी है, जो सपनों की दुनिया में विचरण करती है, किंतु वास्तविकता के कठोर धरातल पर ठोकर खाती हुई अपनी चेतना को जागृत करती है। यह शोध पत्र उपन्यास में वर्णित नारी चेतना के विविध स्वरूप का चित्रण करता है - एक ऐसी चेतना जो पितृसत्तात्मक बेड़ियों से मुक्ति की खोज में है, संबंधों में समानता की मांग करती है एवं स्वालंबन की राह पर अग्रसर है। उपन्यास की मुख्य पात्र रुचि शर्मा के जीवनानुभवों के माध्यम से ममता कालिया आधुनिक नारी की चुनौतियों, द्वंद्व और अन्ततः आत्मसाक्षात्कार का यथार्थ चित्रण करती हैं। उपन्यास में सपने ‘होम डिलीवरी’ की तरह सुगम्य प्रतीत होते हैं, परन्तु उनकी प्राप्ति में व्यक्तिगत, पारिवारिक व सामाजिक बाधाएं प्रमुख भूमिका निभाती हैं। प्रस्तुत शोध पत्र यह समझाने का प्रयास करता है कि नारी चेतना को एक गतिशील शक्ति के रूप में समझना व देखना चाहिए, जहाँ नारी अबला की छवि से उबरकर सबला बनने की दिशा में अग्रसर होती है। प्रस्तुत शोध पत्र नारीवादी साहित्य सिद्धान्त एवं गहन पाठ, विश्लेषण की गुणात्मक व व्याख्यात्मक पद्धति को आत्मसात करके यह भी बताने का प्रयास करता है कि ‘सपनों की होम डिलीवरी’ उपन्यास किस प्रकार समकालीन हिंदी साहित्य में प्रतिनिधि नारीवादी उपन्यास है। साथ ही इसमें अन्य पद्धतियों का भी प्रयोग किया गया है जिससे नारी सशक्तिकरण व उसकी स्वतंत्रता का समग्र व बहुस्तरीय विवेचन व विश्लेषण हुआ है। यह शोध पत्र नारी की बदलती भूमिका एवं उनकी आकांक्षाओं को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण साहित्यिक दस्तावेज है।
