स्वरोजगार और स्वावलंबनरू नानाजी देशमुख के ग्रामीण विकास मडल का एक विश्लेषण

  • सिद्धार्थ मिश्र सहायक प्राध्यापक, समाजशास्त्र विभाग, पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय, शहडोल (मध्य प्रदेश)
Keywords: नानाजी देशमुख, स्वावलंबन, स्वरोजगार, चित्रकूट मडल, दीनदयाल शोध संस्थान, ग्रामीण उद्यमिता, समाज शिल्पी दंपति

Abstract

प्रस्तुत शोध-पत्र में भारतरत्न नानाजी देशमुख द्वारा प्रतिपादित एवं दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा क्रियान्वित ग्रामीण विकास के चित्रकूट मडल का विस्तृत विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है। वर्तमान समय में वैश्वीकरण और अनियंत्रित शहरीकरण के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है, जिसके परिणामस्वरूप बडे पैमाने पर युवाओं का पलायन हो रहा है। इस गंभीर सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि में नानाजी देशमुख का स्वरोजगार और स्वावलंबन का दर्शन एक व्यावहारिक एवं आत्मनिर्भर समाधान प्रस्तुत करता है। इस शोध में यह गहराई से विश्लेषण किया गया है कि किस प्रकार चित्रकूट परियोजना के अंतर्गत सैकडों गाँवों में पानी, श्षि, स्थानीय कुटीर उद्योग तथा स्वास्थ्य एवं शिक्षा के समन्वय से ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाया गया। शोध के मुख्य निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि समाज शिल्पी दंपति तथा उद्यमिता विद्यापीठ जैसी संस्थागत प्रणालियों ने ग्रामीण युवाओं को याचक से उत्पादक में परिवर्तित कर दिया।

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Published
2026-06-25
How to Cite
मिश्रस. (2026). स्वरोजगार और स्वावलंबनरू नानाजी देशमुख के ग्रामीण विकास मडल का एक विश्लेषण. Humanities and Development, 21(02), 245-250. Retrieved from https://humanitiesdevelopment.com/index.php/had/article/view/377