सोशल मीिडया का समाज पर प्रभाव – एक सैद्ांितक िवश्लेषण (Impact of Social Media on Society – A Theoretical Analysis)
Abstract
प्रस्तुत शोध प्रपत्र समकालीन समाज पर सोशल मीकडया के बहुअयामी प्रभार्ों का एक समाज र्ैज्ञाकनक सैद्दांकतक कर्श्लेषण प्रस्तुत करता है । तीव्र सूचना क्रांकत के आस युग में सोशल मीकडया मात्र संचार का माध्यम न रहकर एक ‘अभासी सामाकजक संरचना’ (Virtual Social Structure) के रूप में ईभरा है तथा तीव्रता के साथ स्थाकपत भी होता जा रहा है। यह शोध मुख्य रूप जे.एच. मीड एर्ं ब्लूमर के प्रतीकात्मक ऄन्त: कक्रयार्ाद, चाल्सव कूले के ‘अत्म दपवण का कसद्दांत ’, मैनुऄल कास्टेल्स का ‘नेटर्कव सोसायटी का कसद्दांत’, कमशेल फूको का ‘शकक्त और ज्ञान की मीमांसा’ जाक डेररडा का ‘कर्खंडनर्ाद का कसद्दांत’ आरकर्न गॉफमैन के ‘नाट्यशास्त्र’, जुगवन हेबरमास का ‘पकब्लक स्फीयर’ , जयां बोकिया का ‘ऄकत यथाथवता एर्ं ‘कसमुलेशन’ तथा ‘कडकजटल नारीर्ाद’ कसद्दांतों के अलोक में पहचान कनमावण (Identity Construction) , ऄन्तःकक्रया का स्र्रुप, संबंधों का ऄस्थायी स्र्रुप और कडकजटल सकक्रयता (Digital Activism) का समाजशास्त्रीय पररप्रेक्ष्य में परीक्षण करने का एक प्रयास है । आस प्रपत्र के ऄंतगवत आस तथ्य का कर्श्लेषण ककया गया है कक र्तवमान में सोशल मीकडया ककस प्रकार ‘प्रतीकात्मक ऄंतःकक्रयार्ाद’ के माध्यम से व्यकक्त की अत्म-छकर् और सामाकजक संबंधों को पुनगवकठत कर रहा है। सोशल मीकडया के आस युग में यकद कोइ घटना सोशल मीकडया पर पोस्ट नहीं हुइ, तो अधुकनक चेतना मानती है कक जैसे र्ह घटना सचमुच घकटत ही नहीं हुइ है। ‘कडकजटल नारीर्ाद’ (Digital Feminism) के संदभव में यह स्प???? करता है कक कैसे आंटरनेट ने पारंपररक कपतृसत्तात्मक सीमाओं को चुनौती देकर मकहलाओं के कलए सशकक्तकरण के नए द्वार खोले हैं। साथ ही, तकनीक ककस प्रकार सामाकजक पूंजी की ऄर्धारणा को पररर्कतवत करने में सहायक है। ऄंततः, यह शोध ‘कडकजटल कडर्ाआड’ और ऑनलाआन सुरक्षा जैसी चुनौकतयों को रेखांककत करते हुए एक समार्ेशी कडकजटल साक्षरता की अर्श्यकता पर बल देता है
