सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में व्यावसायिक समाज कार्यकर्ताओं की भूमिका: एक वि‛लेषणात्मक अध्ययन

  • यतीन्द्र मिश्र ॉाोधार्थी: समाज कार्य विभाग, बुंदेलखण्ड वि‛वविद्यालय, झाँसी (उ0प्र0)
  • पवन कुमार विभागाध्यक्ष एवं सह-आचार्य, समाज कार्य विभाग, बुंदेलखण्ड वि‛वविद्यालय, झाँसी (उ0प्र0)
Keywords: सतत् विकास, व्यावसायिक समाज कार्यकर्ता, सामाजिक न्याय, समावे‛ाी विकास, मानवाधिकार।

Abstract

संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा वर्ष 2015 में सतत् विकास लक्ष्यों को प्रस्तावित किया गया, जिसे वर्ष 2030 तक प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन लक्ष्यों में अनेक महत्त्वपूर्ण चुनौतियों की पहचान की गयी; जैसे- असमानता, गरीबी, भुखमरी, स्वास्थ्य संबंधी विसंगतियां, पर्यावरणीय ह्रास, ॉौक्षिक पिछड़ापन, लैंगिक असमानता, सामाजिक अन्याय एवं भेदभाव आदि। चूंकि व्यावसायिक समाज कार्यकर्ता अपने व्यावसायिक मूल्यों, सिद्धांतों एवं पहचान के साथ सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, स‛ाक्तिकरण एवं समावे‛ाी समाज के निर्माण के लिए समर्पित भाव से कार्य करते हंै, इसलिए जमीनी स्तर पर सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में इनकी भूमिका महत्त्वपूर्ण हो जाती है। प्रस्तुत ॉाोध पत्र में समाज कार्य व्यवसाय के उपागमों के प्रयोग द्वारा सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने का परीक्षण किया गया है। ॉाोध पत्र में सतत् विकास के प्रथम पाँच लक्ष्यों- गरीबी उन्मूलन, भुखमरी को समाप्त करना, अच्छा स्वास्थ्य एवं खु‛ाहाली, गुणवत्तापूर्ण ‛िाक्षा एवं लैंगिक समानता को सम्मिलित करते हुए, इन्हें प्राप्त करने में व्यावसायिक समाज कार्यकर्ताओं की भूमिका का वि‛लेषण प्रस्तुत किया गया है। साथ ही इस ॉाोध पत्र में सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में आने वाली चुनौतियों एवं इन्हें प्राप्त करने की रणनीतियांे पर व्यापक चर्चा की गयी है।

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Published
2026-06-25
How to Cite
मिश्रय., & कुमारप. (2026). सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में व्यावसायिक समाज कार्यकर्ताओं की भूमिका: एक वि‛लेषणात्मक अध्ययन. Humanities and Development, 21(02), 178-183. Retrieved from https://humanitiesdevelopment.com/index.php/had/article/view/384