कुंभमेलाः प्राचीनता तथा विश्व का सबसे बड़ा जनसमागम

  • आस्तिक . शोधार्थी- प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्त्व विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ, उत्तर प्रदेश
  • संगीता ॉाुक्ला

Abstract

कुंभ मेला सनातन संस्श्ति का सबसे बड़ा एवं पवित्र तीर्थ मेला है, जहाँ विभिन्न जाति, धर्म एवं लिंग के लोग एकत्र होकर आध्यात्मिक उन्नति करते हैं। यह चार स्थानो पर प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिकं में ग्रहों की स्थिति के आधार पर आयोजित होता है, जिसमें प्रयागराज का त्रिवेणी संगम सबसे प्रमुख है। पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत की बूंदें इन चार स्थानों पर गिरीं, जिससे कुंभ की परंपरा जुड़ी है। प्राचीन प्रमाण ह्वेनसांग (7वीं शताब्दी), तुलसीदास की रामचरितमानस, आदि शंकराचार्य के अखाड़ों और अबुल फजल के उल्लेखों में मिलते हैं।यूनेस्को ने 2017 में इसे मानवता की अमूर्त सांस्श्तिक विरासत घोषित किया है। कुंभ मुख्य रूप से सामान्य, अर्ध, पूर्ण और महाकुंभ के रूप में होता है। महाकुंभ 144 वर्ष बाद प्रयागराज में आयोजित होता है।महाकुंभ 2025 प्रयागराज में विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बना, जिसमें अनुमानित 45 करोड़ की बजाय समापन तक 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे।शाही स्नान मुख्य अनुष्ठान है विभिन्न तिथियों पर करोड़ों ने स्नान किया, जैसे मौनी अमावस्या पर 5 करोड़।प्रबंधन में अस्थायी जिला, ।प्. ड्रोन सुरक्षा, साइबर पुलिस, स्वास्थ्य सेवाएँ, स्वच्छता और बहुभाषी साइन बोर्ड जैसी व्यवस्थाएँ की गईं।विशाल भीड़ के कारण भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चुनौतियाँ प्रमुख रहीं, जिन्हें कुशलतापूर्वक संभाला गया। 1954 की भगदड़ जैसी दुर्घटनाओं से सबक लेकर आधुनिक तकनीक से आयोजन सफल रहा।यह आयोजन आस्था, एकता, भक्ति और वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को दर्शाता है।विदेशी पर्यटक भी शामिल हुए और विभिन्न प्रदर्शनियों से भारतीय संस्श्ति का प्रदर्शन हुआ।कुंभ पाप से पुण्य, सांसारिकता से आध्यात्मिकता की यात्रा है, जो गंगा स्नान से पूर्ण होती है।महाकुंभ 2025 भारत की संगठन क्षमता और सनातन संस्श्ति की महानता का जीवंत प्रमाण बना।

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Published
2026-10-22
How to Cite
.आ., & ॉाुक्लास. (2026). कुंभमेलाः प्राचीनता तथा विश्व का सबसे बड़ा जनसमागम. Humanities and Development, 21(03), 129-137. Retrieved from https://humanitiesdevelopment.com/index.php/had/article/view/423