प्रधानमंत्री जन-धन योजना से सूक्ष्म-ऋण की ओररू ओवरड्राफ्ट सुविधा के उपयोग और पुनर्भुगतान पैटर्न का द्वितीयक डेटा विश्लेषण
Abstract
प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने भारत में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच को सर्वव्यापी बनाकर वित्तीय समावेशन का एक नया अध्याय शुरू किया है। हालाँकि, केवल बैंक खाता खोलना ही वित्तीय समावेशन की सफलता का अंतिम पैमाना नहीं हो सकताय खातों का सक्रिय उपयोग और औपचारिक ऋण तक पहुँच इसकी वास्तविक सार्थकता को निर्धारित करते हैं। मेरे शोध पत्र का मुख्य उद्देश्य जन धन योजना के अंतर्गत उपलब्ध ओवरड्राफ्ट सुविधा के उपयोग, उसकी स्वीकार्यता और पुनर्भुगतान के प्रतिमानों का द्वितीयक आंकड़ों के माध्यम से गहन विश्लेषण करना है। मेरा यह अध्ययन विशेष रूप से यह समझने का प्रयास करता है कि किस प्रकार ओवरड्राफ्ट सुविधा ने ग्रामीण और कम आय वाले परिवारों को अनौपचारिक ऋणदाताओं के जाल से मुक्त कराकर सूक्ष्म-ऋण के औपचारिक चक्र में शामिल किया है। मैने अपने इस शोध में भारतीय रिजर्व बैंक, राष्ट्रीय श्षि और ग्रामीण विकास बैंक, तथा वित्त मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों का सांख्यिकीय और विश्लेषणात्मक अध्ययन किया है। परिणामों से स्पष्ट होता है कि ओवरड्राफ्ट सुविधा ने सूक्ष्म-ऋण की मांग को गति दी है, परंतु पुनर्भुगतान की अनिश्चितता और जागरूकता की कमी अभी भी इसके पूर्ण क्रियान्वयन में मुख्य बाधाएं हैं। मेरा शोध यह निष्कर्ष निकालता है कि यदि पुनर्भुगतान संरचना में लचीलापन और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा दिया जाए, तो जन-धन ओवरड्राफ्ट व्यवस्था भारत में सूक्ष्म-वित्त का सबसे सशक्त माध्यम बन सकती है। मेरा यह अध्ययन नीति निर्माताओं को अति-सूक्ष्म ऋण वितरण की रणनीतियों में सुधार हेतु व्यावहारिक अंतशर््ष्टि प्रदान करता है।
