अयोध्या में संत परम्पराः एक विमर्श

  • अखिलेश कुमार त्रिपाठी असि.प्रो. समाजशास्त्र: टी0एन0पी0जी0 कॉलेज, टाण्डा, अम्बेडकरनगर
  • राघवेन्द्र पाण्डेय* शोधार्थी समाजशास्त्र: डॉ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या

Abstract

अयोध्या मथुरा माया काशी कांची अवन्तिका।

पुरी द्वारावती चैव सप्तैता मोक्षदायिकाः।।

इस श्लोक का सरल अर्थ यह है कि अयोध्या, मथुरा, माया यानी हरिद्वार, काशी, कांचीपुरम, अवंतिका यानी उज्जैन, द्वारिकापुरी ये सातों पवित्र व मोक्षदायीनी पुरियां अर्थात् नगर हैं।

अयोध्या एक नगरी ही नहीं है यह एक धार्मिक नगरी है जहां राजा इक्ष्वाकु से राजा श्रीरामचन्द्र के वंश तक का राज रहा है। अयोध्या एक आध्यात्मिक नगरी है, यहां आध्यात्म के हर पहलुओं का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। अयोध्या कि बात कि जाय और अयोध्या के संतो की बात ना हो। अगर देखा जाय तो अयोध्या के संत हमेशा की तरह समाज के निर्माण, सृजन, संस्कार के साथ-साथ लोगों को अध्यात्म के प्रति प्रेरित करते रहे हैं और लक्ष्य की ओर अग्रसर भी हैं। अगर अयोध्या के शाब्दिक अर्थ की बात कि जाय तो जिसके साथ युद्ध करना असम्भव हो और जिसे पराजित न किया जा सके।

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Published
2022-12-08
How to Cite
त्रिपाठीअ., & पाण्डेय*र. (2022). अयोध्या में संत परम्पराः एक विमर्श. Humanities and Development, 17(2), 47-50. https://doi.org/10.61410/had.v17i2.68