गुुरुकुल प्रणाली: भारत की प्राचीन शिक्षा परम्परा
Abstract
गुरुकुल का उदय प्राचीनकाल से माना जाता हैं। जब शिक्षा प्राप्त करने से किसी भी व्यक्ति में जाति व धर्म का भेदभाव नहीं होता था। प्रत्येक मनुष्य जो शिक्षा प्राप्त करना चाहता था, उसे शिक्षा से विहीन नहीं रखा जाता था। व्यक्ति को जीवन यापन की विभिन्न आवश्यकताआंे के अनुरुप शिक्षा दी जाती थी तथा शिक्षा का स्वरुप मौखिक होता था। शिक्षा का पाठ्यक्रम था, जैसे वेद, उपनिषद, व्याकरण, साहित्य, गणित, ज्योतिष, आयुर्वेद, धनुर्वेद, संगीत, कला, शिल्पकला, कृषि आदि। शिक्षा प्रदान करने के लिये आचार्य होते थे, जिन्हे शिक्षा पूर्ण हो जाने पर दक्षिणा दी जाती थी। शिक्षा प्रदान कराने से पहले उपनयन संस्कार होता था, जिसके बाद विद्या आरंभ होती थी। रामायण और महाभारत में भी इसका वर्णन देखने को मिलता है। वैदिक शिक्षा प्रणाली में भी कुछ ऐसे तत्व विद्यमान है, जो गुरुकुल प्रणाली को बहुत उपयोगी मानते है। भारतीय इतिहास में विभिन्न राजाआंे और उनके परिजनांे ने भी गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने गुरुजनों का मान बढाया है। प्रस्तुत शोध पत्र के अंतर्गत गुरुकुल की इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर चर्चा की जाएगी।
